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पिता (कविता)

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*** पिता *** (मेरे पिता को समर्पित कविता)🙏 एक बेटी और पिता का रिश्ता बहुत अनमोल है यह रिश्ता। पिता करे है लालन पालन , दुनिया का ज्ञान  भी कराता, सही गलत में फर्क बताया, सच्ची दुनिया उससे दिखता,और दुनिया के गमो से बचाता। सच्चा और स्वार्थ रहित  प्रेम वहीं है जो बेटी को  देता। एक बेटी और पिता का रिश्ता बहुत अनमोल है यह रिश्ता.... बेटी की खुशी की खातिर ही, वह हर इच्छा उसकी पूरी करता। पुरूष है ! वह पिता जरूर पर, बेटी की मन कि भावनाएं समझता। उसका दर्द ,उसकी खुशी उस जैसा कोई और पुरूष  कहा समझ पाता। बेटी के प्यार में ,अपना मन मार उसका  मन रख उसकी मन की करता। एक पिता का त्याग चुपचाप से होता , वह  त्याग अपना  किसी को कभी ना जताता। एक बेटी और पिता का रिश्ता बहुत अनमोल है यह रिश्ता... .. एक पिता ही बेटी के अरमानों को है पंख देता, उससे खुद की पहचान बनाने की हिम्मत देता और उसके  हिस्से की आजादी  देता। वह एक ही पुरूष जो उसकी तरक्की से फूला ना समाता ना जलन कोई ना  मुकाबला करता। बेटी की खुशी में खुद की खुशी को देखता।...